followers

मंगलवार, 9 नवंबर 2010

प्यार का पहला बीज


शायद तुम्हें याद हो
दौड़ चली थी तुम
चांदनी रेत पर
मानो पैर नहीं
एक जोड़ा पंख हो ॥

उड़ने लगी थी तुम
उस ऊर्जा के बल पर
जो मैंने तुम्हें दी थी
अपनी हथेलियो से
तुम्हारी हथेलियों में
जो मेहँदी के रंग से जवान था ॥

गुजर गई थी सारी रात
कापते लवों को रोकने में
पहली बार
थरथराया था मेरा शरीर
पहली बार पढ़ा था मैंने
किसी के आंखों की भाषा
और शायद
हमदोनो ने बो दिया था
प्यार का पहला बीज ॥

हर दम्पति किसान बने

करना होता है साफ़
खर-पतवार
किसानों को
फसलों के बीच से ॥
देना होता है
नियत समय पर पानी
तब जाकर देती है फसलें
एक अच्छी उपज ॥

मित्रों .....
हर दम्पति को
बनाना होगा किसान
एक स्वस्थ नागरिक की पौध
तैयार करने के लिए ॥

सोमवार, 8 नवंबर 2010

हँसी का फौआरा


फैशन शो में धक्के से
मैडम गिरी उच्चके से
हाई -हिल की टूट गई कील
होने लगा बहुत बैड फिल ॥
गिरा रैम्प पर बैग उछलकर
बोल पड़े सब .....
चलिए संभलकर ॥
हाई हिल की सैंडल पहन
अब ना चलिएगा दुबारा
नहीं तो आप बनती रहेगी
हँसी का फौआरा ॥

शुक्रवार, 5 नवंबर 2010

डर का नाम शंकर तो नहीं ....


एक अदृश्य चुम्बकीय शक्ति
निकलती है ...
जटाओ से
गले में लिपटे सर्पों से
शरीर में लगे भभूत से
या फिर
कंठ पर रुके हलाहल से ॥

रावण भी पूजता था उन्हें
लंका जाने का निमंत्रण
स्वीकारा उन्होंने/इस शर्त के साथ
बीच में कहीं मत रखना
देवघर के पास
रावण को लघुशंका लग गया
और तब से वे
देवघर वासी हो गए ।

बड़ा दानी है वह
सबसे बड़ा परमार्थी
जो मांगो /वही मिलेगा
मगर सोच समझ कर मांगो
पुत्र मोह की लालच में
सालों पूजा एक भक्त ने
शौच से आते वक़्त
क्रुद्ध हो गया भक्त
लोटा से मार बैठा शिवलिंग पर
लगातार चार पुत्र प्राप्त हुआ
मगर सब के सब रावण ॥

नहीं मांगता वह
सोने का सिक्का /लड्डू /मिठाइयां
खुश हो जाता
बेलपत्र /धथुरा /भांग से ॥

कहते है ....
ब्रम्हा जनक है
विष्णु पालक है
और शंकर संहारकर्ता
अब प्रेम से
या डर से
शंकर सब जगह है

गुरुवार, 4 नवंबर 2010

जागते रहो

समय ......
एक ऐसी गाडी है
जिसमे ब्रेक नहीं होता
एसिलेटर और क्लच भी नहीं
अपनी गैराज में
बंद नहीं कर सकते आप ॥

हमें चलना है
इसी गाडी के साथ -साथ
कैसे चलेगे हम
सिर्फ ....एक ही उपाय है
जागते रहो
और देखते रहो लक्ष्य को
क्योकि
जो सोया ,सो खोया
जो जागा ,सो पाया ॥

मंगलवार, 2 नवंबर 2010

शुभ दीपावली

तम के कुपित घोसले में
सजी दीपों की लड़ी
शुभ दीपावली

लक्ष्मी -गणेश का गुंजा नारा
दरिद्रों में मची खलबली
शुभ दीपावली



घर -घर के दरवाजे पर
मुस्कुरा रही रंगोली
शुभ दीपावली

बाग़ में हर फूल खिले है
हर्षित अलि-अलि
शुभ दीपावली

सोमवार, 1 नवंबर 2010

भाषण

भाषण .....
मैं बोलूंगा
आप सुनेगे
मैं मंच पर रहूंगा
आपसे आखें चार जो करनी है ॥

आयोजकों ने दिया है
एक खास विषय
आप सभी आये है
खास विषय पर सुनने ॥

मगर ....
मैं लोकतंत्र का नेता हूँ
कुछ भी बोलूंगा
आपको सुनना होगा
अपनी सरकार की बड़ाई
और विपक्ष की धुलाई
बीच में टोकने का मतलब
मेरी बेईज्जती ॥

नेता का भाषण
हसुआ के विवाह में
खुरपा का गीत ॥

मेरे बारे में