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सोमवार, 29 नवंबर 2010

ईश्वर उवाच

कहाँ -कहाँ खोजोगे मुझे
मेरा कोई घर ठिकाना है क्या
व्यर्थ गवांते हो अपनी ऊर्जा //

क्या तुम समझते हो
थोडा सा होम
थोड़ी सी धूप
थोड़ी सी कपूर
घंटी का स्वर
और आरती गाकर
पा लोगे मुझे //

सुनो ॥
मेरे और तुम्हारे बीच की दुरी
गाडियों में लगे
दो पहियों के सामान है
दो समानांतर रेखाओ जैसे //

मगर मैंने पढ़ा है
ठोस ज्यामिति के सिद्धांत कहते है
अंनत पर मिलती है
दो समानांतर रेखाए //

राज की बात बता देता हूँ
अपनी बूढी माँ और बूढ़े बाप का
झुरियो वाला चेहरा देखना
शायद ...
मैं तुम्हें वही मिल जाऊ //

रविवार, 28 नवंबर 2010

मैं राम को वनवास नहीं भेजना चाहता

नहीं नहीं ....
मैं दशरथ नहीं
जो कैकेयी से किये हर वादे
निभाता चलूँगा //

मैं .....
खोखले वादे करता हूँ तुमसे
मुझे
अपने राम को वनवास नहीं भेजना //

क्या हुआ
जो टूट गए
मेरे वादे
अपने दिल को
मोम नहीं
पत्थर बनाओ प्रिय //

शनिवार, 27 नवंबर 2010

मैं अब आवाज दूंगा

कब तक दौड़ता रहूंगा
राह काटने वाली बिल्ली के पीछे
अंधविश्वाशो की किताब
मैं अब जला दूंगा //

क्यों नहीं सूखेगे गरीब के आंसू
गरीबों के खून से बनी सोने की लंका
हनुमान बन
मैं अब जला दूंगा //

खड़े होकर खाली खेत नहीं देखूगा
भूख से सोये बच्चों को पेट भरने के लिए
किसान बन
मैं अब जगा दूंगा //

तेरा पढना भी क्या पढना यारो
जो गर की काम ना आये
बेजुवानो की जुबान बन
मैं अब आवाज दूंगा //

अल्लाह को प्यारा हो गया एक बन्दा

पेड़ रंगे थे
घर सजे थे
और यायायात बन्द
कारण ....
मंत्री जी का है आगमन ॥


उधर चिकित्सा -वाहन से
निकलती दर्द की चीख
दब गई सायरन के आवाज में
बन्दा अल्लाह को प्यारा हो गया ॥

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

चार रोटियाँ

( समाप्त हुए चुनाब में बिहार के लोगो ने जाति से हटकर वोट दिया । प्रस्तुत है एक आम बिहारी की मनोभावना )

अब शान से कहूंगा
मैं बिहारी हूँ
मरोड़ दी है गर्दन मैंने
जाति नाम के दैत्य की ॥
मैं .....
उन मेहनतकशो की संतान हूँ
जिनके बल पर चमका है
मारीशस /फिजी और सूरीनाम ॥

पहले मै लगाता था तेल
अपनी मुछों पर
साथ ही अपनी लाठी पर भी
मगर ...
अब आने लगी है खुशबु
विक्रमशिला और नालंदा के
खंडहरों से ॥

अब नहीं जाउंगा मुंबई
राज ठाकरे की गालियाँ सुनने
नहीं जाउंगा
पंजाब और हरयाणा
सरदार के खेतों में काम करने ॥

अब नहीं डरुंगा
गंगा /गंडक के दियारे में बोई
अपनी फसल काटने में
क्योकि मैं जानता हूँ
अब मिलेगा
हर हाथ को काम
और हर खेत को पानी
तो सबके थाली में होगी
चार रोटियाँ ॥

मंगलवार, 16 नवंबर 2010

पदचिन्ह

क्यों न हम
भौतिकी का एक प्रयोग करें
लोहे को
चुम्बक से रगड़ो
उसमें आ जाता है
चुम्बकीय गुण ...//

हम भी बन जायेगे
चुम्बक
गर चलेगें
महापुरुषों द्वारा बनाई
पदचिन्हों पर ....//

सोमवार, 15 नवंबर 2010

मैं हवाई जहाज उडाता हूँ

माँ की गोद में
सीखा तुतलाना
पिता की ऊँगली पकड़
सीखा चलाना
गुरूजी से सीखा
'क ' 'ख 'ग' और
भाईचारा /प्रेम /स्नेह /परोपकार की
साईकल चलना ॥

किशोर वय में सीखा
तितलियों के पीछे भागना
फिर सीखा
पीछे से धक्का देना
दूसरों को लंगड़ी मार
आगे निकल जाना ॥

अब .....
रावन /कंस /कौरव के
बनाए रास्ते पर फर्राटे भरता हूँ
और
बेईमानी /फरेब का
हवाई जहाज उड़ाता हूँ ॥

मेरे बारे में