बचपन में .....
मुर्गा बनाते थे गुरु जी
कुछ बड़ा हुआ
फिर कहने लगे
तुम गदहे हो
उल्लू के पट्ठे हो //
खेलता -कूदता -
उछलता
तो माँ कहती
तुम बन्दर हो क्या //
मेरे ऑफिस में एक कर्मचारी है
बिलकुल सीधा -साधा
लोग उसे गाय कहते है
एक दूसरा कर्मचारी
बिना लिए कुछ करता नहीं
लोग उसे कुत्ता कहते है //
किसी के पक्ष में न बोलो
तो वह कहता है
तुम आदमी हो या पैजामा //
भगवान् सिंह ने कर दी हत्या
हत्यारा कहलाने लगे
अपने ही साथी से बलात्कार कर बैठा
लोग उसे अब बलात्कारी कहते है
अब आगे नहीं लिखूंगा
अब लिखने को बचा भी क्या //
एक प्रश्न का उत्तर चाहिए
मेरे दोस्त ...
हम एक आदमी को आदमी कब कहेंगे ?