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शुक्रवार, 23 मार्च 2012

हर दिल टुटा नज़र आता है //



हर भूखे को चाँद भी रोटी नज़र आता है
जिधर देखो , हर दिल टुटा नज़र आता है //

कुछ इस कदर हिल गया है,विश्वास का पेड़
अब तो हर दोस्त भी ,दुश्मन नज़र आता है //

बहुत बढ़ गया है प्रदूषण , हमारे पर्याबरण में
अब तो हर पेड़ भी , सुखा नज़र आता है //

चीनी खाते है हमसब, मगर मुह में मिठास नहीं है
हर आवाज़ में अब क्यों , कडवाहट नज़र आता है //

रविवार, 18 मार्च 2012

कुछ तो बोलो गोरी


उर का संगम पाकर
मस्त हुई तेरी ओढ़नियाँ
मेरा आलिंगन पाकर
बज उती तेरी पैजनियाँ //

तेरी आँखों में लगकर
मस्त हुआ ये काजल
उड़ता गेसू देख तुम्हारा
मस्त हुआ ये बादल //

तेरे माथे में सजकर
मस्त हुआ ये कुमकुम
कुछ तो बोलो गोरी
क्यों बैठी हो गुम-शुम //

तेरे कानों को चूमकर
मस्त हुई ये बाली
अपना लो प्रीतम मुझको
कर दुगां तेरी रखवाली //

गुरुवार, 15 मार्च 2012

फेस बुक


नहीं चिल्लाता बच्चों पर अब , रहता हूँ मैं अब चुप
भूख नहीं लगती है मुझको ,ना ही पीता मैं अब सूप
नहीं संभालता मैं किचेन , ना ही बनता मैं अब कुक
जब से लाया हूँ ,बीबी की सौतन नई नवेली फेस-बुक //



सारा ध्यान स्टेटस पर अब , कितने कमेंट्स हैं आये
कौन फ्रेंड्स हैं स्नेह बनाए , कौन फ्रेंड्स अलसाए
महिला मित्रों की चैत्तिंग से , बदल जाता मेरा रंग-रूप
सुबह -शाम मत मिलना मुझसे ,कहता मित्रों से दो टूक//

मंगलवार, 13 मार्च 2012

जी करता है ....


जी करता है ....
तेरी यादों से खेलूं
जी करता है ....
तेरे सपनों में जी लूं //

जी करता है ...
तेरा यौवन छू लूं
जी करता है ....
तेरे नयनों को पी लूं //

जी करता है ...
तेरी साँसों में बसकर
फूलों को महका दूँ
जी करता है ...
तेरे उर में घुसकर
अंग-अंग दहका दूँ //

जी करता है ...
तुमको फिर से पा लूं
जी करता है ...
तुमसे मिलकर जी भर रो लूं //

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

रावण सिंह

मेरे पड़ोस में रहते हैं -रावण सिंह
वे रामायण के रावण जैसे नहीं दिखते//

वे इन्कम-टैक्स भरते है
वे होल्डिंग टैक्स भरते हैं
वे वेल्थ -टैक्स भरते है
उनकी मूछें नहीं है
न ही खुटीदार दाढ़ी
नेता /पुलिस से उनकी छनती है
लोग दबी ज़वान से कहते है
उनके यहाँ हर किस्म की वाईन मिलती है //

वे मिलनसार हैं
फिर भी , पता नहीं क्यों
आम लोग उनसे डरते हैं//

अरे! एक बात तो भूल ही गया
वे सीता-हरण नहीं करते
बल्कि ,रोज नई -नई सीता
खुद ही चलकर
आती है उनके घर //

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

मैथेमेटिक्स


मैं इंजीनियर हूँ मेरे दोस्त!
मेरा मैथेमेटिक्स भी ठीक है
मगर मैंने जिंदगी का गणित नहीं सीखा //


कास्ट फैक्टर
मैनेज सिस्टम
नोटों के चुम्बकीय गुण
नहीं पढ़ा मैंने ...
मैंने नहीं सीखा
झूट-फेरब और
चापलूसी का समीकरण हल करना
बस यही मार खा गया दोस्त//

बचपन में सुनी थी एक कहानी
एक नदी दस फिट गहरी थी
गणितज्ञ ने गहराई का औसत निकला
औसत चार फिट aaya ...
नदी पार करने लगा
वह नदी में डूब गया //
तो दोस्तों !
जिंदगी जीने का गणित सीखो //

बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

पर्दाफाश


कुहू-कुहू सुन झूमे मन
जब बसंत है आता
लोभ का चादर जब मैं ओढू
मेरा विवेक मर जाता //

आंच आता जब मेरे स्वार्थ पर
मैं तिल का ताड़ बनाता
बात -बात पर मित्रों का मैं
निन्दा -रस पान कराता //

रुपयों -पैसों की खातिर मैं
छल की तलवार चलाता
हार प्रतीत होने पर
तुरंत ही शीश नवाता //

माँ -पिता भी गुरु तुल्य है
इस बात को मैंने झुठलाया
आत्मा-शांति करने उनका
'गया ' में पिंड -दान करवाता //

जब भी आगंतुक आता
मीठी बातों की छौक लगाता
इज्जत ढकने को खातिर
मैं झूठ का लेप लगाता //

जब देखू कोई नार सुंदरी
मैं मंद-मंद मुस्काता
शादी का प्रलोभन दे मैं
नित नए-नए रास रचाता //

मेरी बातों में न दम है
न किये गए पापों का गम है
अपने कुकृत्यों को धोने
मैं गंगा रोज नहाता //

मुह में राम ,हाथ में छुरी
यह निति अब मैं अपनाता
नेता और पुलिस देखकर
अब नहीं कभी घबराता //

मेरे बारे में