दिलासा
एक दवा है
शब्दों की दवा
जिसमे कोई केमिकल नहीं ॥
खत्म हो जाती है
कर्मचारियों की हड़ताल
बंद हो जाता है
छात्र -आन्दोलन
क्षण में बदल जाता है
एक बच्चे का रुदन
मुस्कराहट में
जब पिलाई जाती है
दिलासा की एक घुट ॥
रुक जाता है
विधवा विलाप /उग्र -प्रदर्शन
नेता पुनः वोट मांग लेते है
दिलासा की दवा पिला कर
यह दवा
मानो राम -वाण हो ॥
followers
रविवार, 31 अक्टूबर 2010
शनिवार, 30 अक्टूबर 2010
भूजा
भूंजा
आग पर
पकाया हुआ अनाज
इसमें नहीं होते
वसा /नमी /प्रोटीन और खनिज
जीभ को तो भाती है
मगर ......
शरीर को ऊर्जा नहीं देती ॥
आज हम
रिश्ते बनाते है
ठीक भुन्जे की तरह
जो दिखने में
आकर्षक तो हैं
मगर उर्जावान नहीं ॥
आग पर
पकाया हुआ अनाज
इसमें नहीं होते
वसा /नमी /प्रोटीन और खनिज
जीभ को तो भाती है
मगर ......
शरीर को ऊर्जा नहीं देती ॥
आज हम
रिश्ते बनाते है
ठीक भुन्जे की तरह
जो दिखने में
आकर्षक तो हैं
मगर उर्जावान नहीं ॥
पगडंडी
आज जिन रास्तों पर
हमने बनाई
चमचमाती सड़के
कभी वह पगडंडी थी
जो हमारे
पुरखों के पदचिन्हों से बना था ॥
काश .....
हम चमका देते
उनके बनाए
सभी पगडंडीयो को
जो इंसान को
इंसानियत की मंदिर तक
पहुंचाते थे ॥
हमने बनाई
चमचमाती सड़के
कभी वह पगडंडी थी
जो हमारे
पुरखों के पदचिन्हों से बना था ॥
काश .....
हम चमका देते
उनके बनाए
सभी पगडंडीयो को
जो इंसान को
इंसानियत की मंदिर तक
पहुंचाते थे ॥
शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2010
बबूल और मैं
मैं एक पौधा था
नर्म कोमल
टहनियाँ थी मेरी
लोग आते
तोड़ लेते मेरी टहनियाँ
बना लेते दातून
जीना मुश्किल था मेरे लिए ॥
मेरे बगल में
कांटो से भरा एक बबूल भी था
उसने कहा
मर जाओगे जल्द ही
जीना है तो
पैदा कर लो
अपनी टहनियों में कांटे ॥
सच में .....
जब से मैंने कांटों की
चादर ओढ़ी
बड़ा शकून है ॥
मगर क्या
ये अच्छी बात है ?
नर्म कोमल
टहनियाँ थी मेरी
लोग आते
तोड़ लेते मेरी टहनियाँ
बना लेते दातून
जीना मुश्किल था मेरे लिए ॥
मेरे बगल में
कांटो से भरा एक बबूल भी था
उसने कहा
मर जाओगे जल्द ही
जीना है तो
पैदा कर लो
अपनी टहनियों में कांटे ॥
सच में .....
जब से मैंने कांटों की
चादर ओढ़ी
बड़ा शकून है ॥
मगर क्या
ये अच्छी बात है ?
गुरुवार, 28 अक्टूबर 2010
चम्मच
पढ़ा था .....
नहीं निकलती घी
सीधी अंगुली से
कोशिश मैंने भी की
असफल रहा ॥
मैंने भी खाई थी कसम
घी निकालूँगा
बिना अंगुली टेढ़ी किये ही
और फिर
चम्मच ने काम आसान कर दिया ॥
क्या आप से भी घी नहीं निकल रही
हर जगह मिलते है
ऐसे चम्मच
हर काम करने में सक्षम
जैसा काम ,वैसा दाम ॥
नहीं निकलती घी
सीधी अंगुली से
कोशिश मैंने भी की
असफल रहा ॥
मैंने भी खाई थी कसम
घी निकालूँगा
बिना अंगुली टेढ़ी किये ही
और फिर
चम्मच ने काम आसान कर दिया ॥
क्या आप से भी घी नहीं निकल रही
हर जगह मिलते है
ऐसे चम्मच
हर काम करने में सक्षम
जैसा काम ,वैसा दाम ॥
बुधवार, 27 अक्टूबर 2010
फूल और मैं
मैंने फूलों को तोड़ा
सुखा दिया रखकर उसे
किताबों के दो पन्नों के बीच
फिर पंखुड़ी -पंखुड़ी अलग कर दी
फिर पैरो से कुचल दिया ॥
मगर ....
खुशबू नहीं मरी ॥
एक मैं हूँ ..दोस्तों
किसी इंसान के
ज़बान से शब्द फिसले क्या
तूफ़ान मचा देता हूँ
तुरंत अपने को
हैवान बना लेता हूँ ॥
सुखा दिया रखकर उसे
किताबों के दो पन्नों के बीच
फिर पंखुड़ी -पंखुड़ी अलग कर दी
फिर पैरो से कुचल दिया ॥
मगर ....
खुशबू नहीं मरी ॥
एक मैं हूँ ..दोस्तों
किसी इंसान के
ज़बान से शब्द फिसले क्या
तूफ़ान मचा देता हूँ
तुरंत अपने को
हैवान बना लेता हूँ ॥
मंगलवार, 26 अक्टूबर 2010
मैं भी जड़ बनूगा
सदस्यता लें
संदेश (Atom)

