मन
बुनता है जाल
रोकता है रास्ता
इंसान को फंस कर गिरता देख
हँसता है मन //
पता नहीं कब...
मन बना लेता है
घोटाले का प्लान
अपहरण की साजिश
और कर बैठता है
दुष्कर्म /बलात्कार और हत्या //
सच में ...
जलेबी की तरह है
मन की बनावट
बुनता है जाल
रोकता है रास्ता
इंसान को फंस कर गिरता देख
हँसता है मन //
पता नहीं कब...
मन बना लेता है
घोटाले का प्लान
अपहरण की साजिश
और कर बैठता है
दुष्कर्म /बलात्कार और हत्या //
सच में ...
जलेबी की तरह है
मन की बनावट



