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बुधवार, 25 अगस्त 2010

डेटोल की खुशबु

आव़ाज सुनकर
पहचानना आसान होता है
मगर सूंघकर किसी स्थान का पता लगाना
शायद मुश्किल हो ॥

मगर डेटोल की खुशबु
अस्पताल होने का पक्का प्रमाण होगा ॥

मैं गया ....
गाँव के स्वास्थ्य -उपकेन्द्र
पट्टी बंधवाने अपने चोट पर ॥

अन्दर घुसा
बेड पर दो -तीन कुत्ते सोये थे
मानो ईलाज कराने आये हो
एक कमरे में
गाय ने अभी -अभी बछड़ा जना था
डेटोल की खुशबु तो नहीं मिली
गोबर की संडास भले मिली ॥
मुझे लगा ....
पशु अस्पताल तो नहीं आ गया मैं ॥

लेकिन नहीं
गाँव के ही मानव अस्पताल में था मैं
पता चला
नर्से और कम्पौन्दर
पल्स -पोलिओ अभियान में व्यस्त है ॥
और इधर .....
मानव अस्पताल
तब्दील हो गया है ,पशु अस्पताल में ॥

2 टिप्‍पणियां:

  1. कैमरे से भी इतना अच्छा चित्र नहीं बन पायेगा बबन जी. क्या चित्रण किया है.

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  2. अच्छा लगा 21वीं सदी का इंद्र धनुष :)

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