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बुधवार, 11 अगस्त 2010

फूलों ने खुशबू उधार ली है आपसे


बेनतीजा रहा मस्तानी पुरवाई का , आपकी बदन को चूमना
सारे फूल आपके बदन की खुशबू , पहले से ही उधार ले चूके थे ॥

काले बादल कुछ इस तरह चूमी , बर्फीली चोटियों को
जुल्फें झटक कर ढक ली आपने जैसे , अपनी उरोजों को ॥

1 टिप्पणी:

  1. ♥यकीन कर लो मुझे मुहब्बत है तुमसे .....मेरी ये दुनिया एक हसीन जन्नत है तुमसे ....♥बहुत खूब प्रस्तुति, आदरणीय भाई .....मरहबा

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