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रविवार, 22 अगस्त 2010

अनाज कारखानों में नहीं बनते

हमें आजादी मिली....
सब कुछ करने की
सोचने की
लिखने की
बोलने की
और जनसंख्या बढ़ाने की ॥

हमने खूब मकानें बनाई
हमने खूब सडकें बनाई
हमने खूब पुले बनाई
हमने खूब कारखाने खोले ॥

आजादी मिली थी
सबको रोटी खाने की
खेतों में फसलें लहलहाने की ....
मगर....आज भी
३६०० कैलोरी से भरी थाली नहीं मिलती ॥

मेरे दोस्तों ...
अनाज कारखानों में नहीं बनते
बल्कि ,कारखाने अनाज से चलते है ॥

जरुरत है ...मेरे दोस्तों
दूसरी हरित क्रांति की
नेहरु जी ने कहा था
बाँध और नहरें मंदिर है
इंजिनियर उसके पुजारी ॥

अब समय आ गया है , दोस्तों
दूसरी हरित क्रांति की
किसानों /मजदूरों के सम्मान की
टुकड़े -टुकड़े खेतों को
जोड़ने की मुहीम चले
मिटटी जांच की मुहीम चले
कृषि -यंत्रों की मुहीम चले
हर खेत को पानी देने की मुहीम चले
हर हाथ को काम देने की मुहीम चले
भारत की मिटटी सोना फिर से उगलेगी ॥

आईये ...मेरे दोस्तों
अपने क्रांतिकारी पूर्वजों से कह दें
आपकी दी आजादी
अक्षुण रखी है मैंने ॥

2 टिप्‍पणियां:

  1. aapki sarthak rachna.

    अपने क्रांतिकारी पूर्वजों से कह दें
    आपकी दी आजादी
    अक्षुण रखी है मैंने ॥

    मैं अभी कहने की स्थिति में नहीं हूँ अभी उनके सपनो का देश बनाने के लिए बहुत सुधार करना है, बहुत काम बाकी है. मैं उनसे माफ़ी मंगुगा ६३ साल बाद भी हम उनका सपना पूरा नहीं कर पाए हैं, हाँ प्रयास जारी है, पर लगन और तेजी लानी होगी.

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  2. Wah...Shree Baban Bhai Ji, aap sahi likhe hai...mai iska vishleshn kya karu...han ab samay aa gaya hai ki Kisano/ Majaduro ke hak ke liye ham sabhi aage aaye, auy unehn ehasas kareye ki Jago kisano/majaduro -
    "अनाज कारखानों में नहीं बनते
    बल्कि ,कारखाने अनाज से चलते है ॥"

    Aur ham sabhi ko karana hoga ki "jab Kisano/Majduro ki line khatm hogi,
    tab hamari line shuru hogi."
    ye hi hamare amar shahido ke liye asali
    'Shradhanjali' hogi aur asali 'Aajadi'

    Aap ka ye lekh Bharatvash ke liye bahut hi upayogi hai...Dhanyabaad.

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