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रविवार, 22 अगस्त 2010

हसिनाये घर को आसमान बना देती है


लेती है वो अंगडाई , तो बिजली चमक जाती है
उड़ाती हैं दुप्पट्टा ,तो हवा भी सहम जाती है ॥

साँसे लेती हैं वो , तो दौड़ कर खुशबु पास आ जाती है
पायल की झनक सुन ,बुलबुल भी चुप हो जाती है ॥

उनकी निगाहें देखने को , हरियाली भी तरस जाती है
जुल्फ झटक दे अगर वो ,बादल भी बरस जाती है ॥

सुना है , हसिनाये नौज़वानो को गुलाम बना लेती है
तिल को ताड़ कर , घर को आसमान बना देती है ॥

4 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन लिखा है आपने ..... प्यार के पींगे बढ़ा के मूड को रोमांटिक बना के तिल का ताड़ बना दिया और घर को आसमान और तो और बादल भी फाड़ दिया

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  2. दुपट्टे को गले में फांसी की तरह फंसाकर
    हम तो नए ज़माने के हैं
    बेरहमी से जींस को टॉप से जुदा कर
    हम तो नए ज़माने के हैं

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