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शनिवार, 28 मई 2011
वाह ! काजल वाह!
बिहार के मधुबनी जिला के हरलाखी प्रखंड के एक कुमारी कन्या के मुखिया पद पर चुने जाने की घटना से बदलाब की हवा और मजबूत हुई है । मेरे विचार से समाजशास्त्र में स्नातक काज़ल कुमारी का ध्यान सबसे पहले आँगन बाड़ी केन्द्रों को सुचारू रूप से चलाने में होना चाहिए । प्रखंड के पदाधिकारियो, प्रमुख, और मुखिया की शेअरदारी को ख़त्म करने की पहल उनके द्वारा की जानी चाहिए ताकि बच्चों आयर गर्भवती महिलायों को योजना का वास्तविक लाभ मिल सके
गुरुवार, 19 मई 2011
आगोश
गुरुवार, 5 मई 2011
कावं-कावं हो गई जिंदगी
बुधवार, 20 अप्रैल 2011
नीबुओं जैसी सनसनाती ताजगी

हम- तुम मिलते थे
दूसरों की नज़रों से बचते -बचाते
कभी झाड़ियों में
कभी खंडहरों के एकांत में
सबकी नज़रों में खटकते थे
फिर एक दिन ...
घर से भाग गए थे
बिना सोचे-समझे
अपनी दुनियाँ बसाने //
नीबुओं जैसी सनसनाती ताजगी
देती थी तेरी हर अदा
कितना अच्छा लगता था
दो समतल दर्पण के बीच
तुम्हारा फोटो रख
अनंत प्रतिबिम्ब देखना
मानो ...
तुम ज़र्रे-ज़र्रे में समाहित हो //
कहने को
हम अब भी
एक-दूजे पे मरते है
एक-दुसरे के साँसों में बसते हैं
एक-दूजे के बिना आहें भरते है
मगर ....
दिल के खिलौने को
हम रोज तोड़ते हैं
क्योकि हम प्यार करते है //
सोमवार, 18 अप्रैल 2011
धूल
अभी कल की ही बात है
थोडा सा रद्दी कपडा
मैंने भिगोया पानी में
पोछ ( साफ़ ) डाले
सारे धूल
जो जमे थे
मेरे घर के
खिडकियों के शीशे पर //
आज धूप भी खिलकर आई थी
कमरे के अंदर //
काश !!!
कितना अच्छा होता
एक भींगे कपडे से
मैं उस धूल को पोछ पाता
जो मैंने
जिंदगी के रेस में
साथ चलने वालों के
चेहरों पर फेकें हैं//
थोडा सा रद्दी कपडा
मैंने भिगोया पानी में
पोछ ( साफ़ ) डाले
सारे धूल
जो जमे थे
मेरे घर के
खिडकियों के शीशे पर //
आज धूप भी खिलकर आई थी
कमरे के अंदर //
काश !!!
कितना अच्छा होता
एक भींगे कपडे से
मैं उस धूल को पोछ पाता
जो मैंने
जिंदगी के रेस में
साथ चलने वालों के
चेहरों पर फेकें हैं//
गुरुवार, 14 अप्रैल 2011
अनोखा प्यार
गुरुवार, 7 अप्रैल 2011
थकना मना है
नहीं थकती है हवा
नहीं थकती लहरें
नहीं थकती खुशबू
नहीं थकते हैं हम
जब बात चलती है
बोनस और ओवर टाईम की //
अगर थकता तन ...तो
न मिलते मजदूर, न बुनी जाती डोरी
न निकलते चोर, न होती चोरी
न होती बात -बात पर सीनाजोरी //
दोस्तों ! आदमी का
तन नहीं, मन थकता है
मगर.....
जिनके पास है
हौसला और लगन की
एक जोड़ी पंख
उनका मन कहता है
थकना मना है //
नहीं थकती लहरें
नहीं थकती खुशबू
नहीं थकते हैं हम
जब बात चलती है
बोनस और ओवर टाईम की //
अगर थकता तन ...तो
न मिलते मजदूर, न बुनी जाती डोरी
न निकलते चोर, न होती चोरी
न होती बात -बात पर सीनाजोरी //
दोस्तों ! आदमी का
तन नहीं, मन थकता है
मगर.....
जिनके पास है
हौसला और लगन की
एक जोड़ी पंख
उनका मन कहता है
थकना मना है //
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