हर पत्ते पर नाम लिखूंगा
हर पंखुड़ी पर गीत
कोई नहीं और है दूजा
तुम केवल ,मेरे मनमीत //
हर तितली संदेशा भेजे
हवा तुम्हारी यादों में गाये
ओ मेरी सजनी , जल्दी आ तू
अब समय रहा है रीत //
कोई नहीं और है दूजा
तुम केवल ,मेरे मनमीत //
झरने की जल सी तू पावन
हो जहां तुम ,वही है सावन
मर चूका मेरे दिल का रावण
सुन-सुन तेरे आँचल का संगीत
कोई नहीं और है दूजा
तुम केवल ,मेरे मनमीत /
(चित्र मेरी श्रीमती जी नीलू पाण्डेय जी का है )




