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गुरुवार, 23 अगस्त 2012

खिली प्यार की एक कली


खिली प्यार की एक कली
जब तुम आई दिल की गली //

मक्खन सी फिसलन तेरी बाँहों में
खिला कचनार तेरी अधरों में
उर से है, अब मकरंद टपकता
जवा हुई  अब उर की फली //
खिली प्यार की एक कली
जब तुम आई दिल की गली

चाँद भी धोखा खा जाएगा
सावन भी ठगा रह जाएगा
जो  देखे तेरा प्रचोदित यौवन
तुम्हें खोजता वह गली-गली //
 खिली प्यार की एक कली
जब तुम आई दिल की गली//

A blossoming bud of love
I heart you lane / /

Slippery butter in your arms
Bauhinia feeding of your lips
Ur, now dripping nectar
Now, ur Jwa pod / /
A blossoming bud of love
I heart you Alley

The moon will be betrayed
Sawan also will be duped
See that thy youth Prchodit
Finding you the street - street / /
  A blossoming bud of love
I heart you lane / /

रविवार, 5 अगस्त 2012

मुझे रश्क है ..

मुझे रश्क है ..
आपकी आँखों से
जिसने चुम्बकित कर
मुझे आलिगन  को मजबूर किया //

मुझे रश्क है
हरी दूबों पर टिकी
सुबह की उन ओसों से
जो आपके परों को धो देती है //

और सुनिए ...
मुझे रश्क है
इन हवाओं से भी
जो आपकी जुल्फों से आलंगित हैं

मंगलवार, 10 जुलाई 2012

मुस्कुराहटों की किताब

आपके  गुलाबी  लवों  में बड़ा  दम है
हंसती कलियाँ भी,इनके आगे कम हैं //

 आपकी सुरीली अंखियों की क्या बात है
इनके आगे ,मयखाने की क्या औकात है //

आपकी मुस्कुराहटों पर लिख रहा हूँ किताब
परेशान हूँ   मैं  , पन्ने लग रहे हैं बे-हिसाब //

आपके उर के फ़राख की चर्चा है महफिल में
थक जाते है मांगते-मांगते नाशाद दिल वाले //

(उर के फ़राख = हृदय की विशालता
नाशाद = बदनसीब )

सोमवार, 18 जून 2012

ओ मेघ ! तू बरस

ओ मेघ ! तू  बरस
घनघोर बरस
तू उनके लिए  बरस
जिनके कुएं
सरकारी पन्नों पर बने हैं //

ओ मेघ ! तू बरस
घनघोर बरस
फाड़  दे
जनता के कान पर जमे
भाषणों और अश्वाश्नों की काई को //

ओ मेघ ! तू बरस
घनघोर बरस
इतना बरस
टूट जाए तटबंध नदियों की
खोल दे पोल
इन्जिनीर और ठ्केदार के मिलीभगत की //

रविवार, 10 जून 2012

गरजो बादल , बरसो बादल

गरजो बादल , बरसो बादल
सूख गई आँगन की तुलसी
और सूख गई माँ की  आंचल
गरजो बादल , बरसो बादल //

सूख गए है खेत और नदियाँ
सूख गई तरुवर की कलियाँ
सूख गई अधरों की लाली 
सूख गई आँखों का काजल  
गरजो बादल , बरसो बादल //

सूख गया कुयाँ का  पानी
रूठ गई झरनों की वाणी
रूठ गए हैं सारे बुल-बुल
रूठ गई गोरी का पायल
गरजो बादल , बरसो बादल //


सोमवार, 4 जून 2012

आक्सीजन

मुझे नहीं पता था 
पेड़ लगाने का मतलब
पर जब .....
चिड़ियाँ ने पेड़ पर घोसले बनाये
अंडे फूटे
और जब मैंने सुना
अण्डों से निकली बच्चों की चपर-चपर
तब लगा
पेड़ सिर्फ आक्सीजन ही नहीं देते /

बुधवार, 23 मई 2012

आग उगल रही आकाश

( बाल कविता लिखना भी आसन नहीं  होता, मैंने एक प्रयास किया है ) 

तप  रही है  सारी  धरती  
आग उगल रही आकाश //

 क्या पीयेगें ,   वन के प्राणी 
कहाँ टिकेगें , सारे  नभचर 
सिकुड़ गयी है पेट सभी की 
सूख गयी है अब सारी  घास //

सूख  गए सब ताल- तल्लैया 
और मर गयी मछली   रानी 
दादा-दादी हैं सब लथ -पथ
अब मैं जाऊ किसके  पास //

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