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शनिवार, 11 दिसंबर 2010

बदरंग हुआ इन्द्रधनुष


पक्षियों का बन्द था कलरव
फूलों की गायब थी मुस्कान
और मस्त नहीं थे भवरे //
मैंने पूछा ..... क्या हुआ
सभी ने एकस्वर से कहा
हमने मिलकर
बनाया था रंगीला इन्द्रधनुष
मगर ......
कुछ नेताओ और पूंजीपतिओ के
हाथ लग गई
घोटाले की रबर
बेरंग कर दिया इन्धनुष //

18 टिप्‍पणियां:

  1. Thanks for sharing.It's a lovely composition with meaningful thought.

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  2. hamari bhartiy samajik sanrachana ka indradhanush aasmani satrangi indradhanush se kahin adhik rango se bana hua hai. kintu neta prajati ke ye safed kauye usko badarang karne par tule hue hain. achchi rachna

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  3. करारा तमाचा मारा है आपने . लेकिन हम नहीं सुधरेंगे .
    http://ashishkriti.blogspot.com/

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  4. kise achchha kahen, aur kise kharab,

    ek taraf nagraj to dusari taraf saanp raj,

    bahut khub baban ji.

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  5. बेहतरीन रचना।
    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (13/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  6. Thats a truth of Indian Politics..you are right Baban ji..!

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  7. बबन भाई साहिब .........कुछ पूंछू ........पूंजी पतियों के घोटालों की खबर हम को (मीडिया) को लग गयी ..........या .......उनको लग गयी ?????????????????चलो कोई बात नहीं घोटाले तो हैं ही कहीं भी हो माहोल तो बदरंग करते ही हैं......जागृत विचार

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  8. Vijay Lakshmi Bhuwania December 12 at 8:47pm
    बबन जी, क्या ये संभव नहीं हो सकता की सब मिल कर इन पूंजीपतियों और नेताओं को(जो की हर वक़्त" प्रदुषण "ही फैलाते हैं) ही रबर से मिटा दें., जो की इन्द्रधनुष की खूबसूरती ख़त्म करने का जिम्मा ले रखें हैं....................फिर तो पक्षियों का कलरव भी सुनने को मिलेगा ,
    फूलों की मुस्कराहट भी और भँवरे भी मस्त नज़र आयेंगे.

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  9. अच्छी व्यंग से परिपूर्ण अभिव्यक्ति।

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  10. वाक में बेरंग कर दिया इन्द्रधनुष!

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  11. वाकई में बेरंग कर दिया इन्द्रधनुष!

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  12. baban ji kya vyangya hai....... saamyik bhi... dil ko chhune wali.........

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  13. बहुत ही खुबसुरत रचना.......मेरा ब्लाग"काव्य कल्पना"at http://satyamshivam95.blogspot.com/ साथ ही मेरी कविताएँ हर सोमवार और शुक्रवार "हिन्दी साहित्य मंच" पर प्रकाशित....आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे....धन्यवाद।

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