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मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

भारत बदल गया है


सब कुछ पलट गया है
भारत बदल गया है //

घर- घर में है मुमताज
मगर महल ताज नहीं है
घर -घर में है वीणा
मगर साज नहीं है //

घर -घर से उठती है
रोज तलाक़ की चीखें
देवियों के देश में
देवियों पर रोज उठती बाहें //

भगवत- भजन और कीर्तन की
खुल रही है धोती
जनता खोज रही दाना -दाना
नेता चुग रहे मोती//

28 टिप्‍पणियां:

  1. बबन जी, बदले हुए ..........या बदलते हुए भारत का बहुत सटीक चित्रण किया है आपने!!!!

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  2. इसलिए तो बंधू
    भारत बदल गया है..
    जो मिला हमें विरासत में
    वो लगता है ओल्ड फैशन
    करते है हम गली मोहल्ले
    बिग बोस और राखी सावंत के किस्से

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  3. Baban ji sahi kaha aapne aaj aisa hi samay aa gaya hai ki hans dhana dunka chug rahe hai, aur kawo ke muh me moti hai..............

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  4. वाह क्या बात कहि है भाई साहब..भगवत- भजन और कीर्तन की खुल रही है धोती, जनता खोज रही दाना -दाना नेता चुग रहे है मोती !

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  5. बदलते हुए भारत का बहुत सटीक चित्रण!!!

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  6. सुंदर प्रस्तुति। गोपी का गाना याद आ गया - हे रामचन्द कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा, हंस चुनेगा दाना-दुनका कौआ मोती खाएगा।

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  7. Sir ji, bahut acha...
    asal mein bharat desh apne mulay khota jaa raha hai...
    purani sanskriti ka patan ho raha hai
    aur pachimi sabhyata ne sub ko jakad liya hai

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  8. Sachmuch Bharat badal gaya hai, kaise! Ashleel vastra dharan kiye hue yuva varg, bhajno ki jagah disco aur pop sangeet, har ghar se uthti talak ki pukar, sadkon par badhta apradhikaran, ek ek khulte ghotalon ke pitare aaj ke Bharat ka yatharth chitran karta hai! Baban ji aapne bada hi sajeev chitran kiya hai aaj ke Bharat ka!

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  9. बहुत सही कहा आपने...

    भारत सचमुच बहुत बदल गया है...

    प्रासंगिक प्रभावशाली रचना...

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  10. बहुत ही बढ़िया रचना बबन जी......नेता चुग रहे मोती ज़ाण्टा टाऱाश रही दाने दाने को, बस इंतजार है उस दिन का जब उगता सूरज कहेगा बस अब तो कुछ नही बचा जलाने को....

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  11. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (16/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  12. बहुत अच्छा लिखा है बबन भाई. आप की लेखनी समाज को दिशा देती है.

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  13. कम शब्दों में विस्तृत वर्णन, सुन्दर रचना, साधुवाद.

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  14. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति.........मेरा ब्लाग"काव्य कल्पना" at http://satyamshivam95.blogspot.com/ जिस पर हर गुरुवार को रचना प्रकाशित साथ ही मेरी कविता हर सोमवार और शुक्रवार "हिन्दी साहित्य मंच" at www.hindisahityamanch.com पर प्रकाशित..........आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे..धन्यवाद

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  15. घर घर में है वीणा मगर साज नहीं है।

    सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई

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  16. Sunder, ati sunder! Aap likhen aur dil ko n chhuyen ho hi nahin sakta

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  17. बहुत सही कहा आपने...

    भारत सचमुच बहुत बदल गया है...बहुत अच्छा लिखा है बबन भाई.

    Dhananajay Mishra

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  18. बबन जी.....बहुत बढ़िया रचना आपकी.........पढकर 'गोपी' फिल्म का गाना याद आ गया.......
    राम चन्द्र कह गए सिया से
    ऐसा कलयुग आएगा
    हंस चुगेगा दाना तिनका
    कौया मोती खायेगा..........
    और वही समय आ गया है अब..........

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  19. सुंदर रचना के लिए साधुवाद! मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!

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  20. बबन जी, आपका प्रहार भारत जैसे नैतिक देश के नागरिकों पर एकदम सही है... समृधि का झूठा जाल फैलाकर हम नैतिक रूप से कंगाल हो चुके हैं. ऋषि, मुनिओं के इस देश में साधू, महात्माओं के घृणित इक्षाओं को हम सब ने देखा है, विद्यालयों जैसे पवित्र मंदिर में जहाँ एक स्वस्थ्य, स्वाबलंबन की शिक्षा के बजाय अब नौनिहालों का शोषण किया जा रहा है, और उन नौनिहालों के अभिवावक भी शोषित होते जा रहे हैं.... हम सब ने नेताओं के उदासीन, हास्यपूर्ण, नफरत पर आधारित, और अमानवीय नेतृत्व भी देखा है और देख रहें है. रिश्ते को भी तर-तर होते देखा है पति-पत्नी, भाई-बहन, गुरु-शिष्य-शिष्या, आदि सभी अपने अपने स्वार्थ के लिए किसी हद तक अपने नैतिकता को पतित कर सकते हैं: राजेश गुलाटी इस का एक ज्वलंत उदाहरण है..... दरअसल लोगों में 'नैतिक मूल्य' का कोई स्थान रहा ही नहीं है बस पैसा, पद, और झूठा सम्मान के लिए वो कुछ भी कर सकते हैं....यही नैतिक हास हमारे इस महान देश को इस 'बदलाव' का कारण है.....
    सादर!
    '

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  21. सबी कुछ तो कह दिया आपके शब्दों ने!
    --
    वाकई भारत बदल गया है!

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  22. बहुत सही आज के बदले भारत की तस्वीर दिखाई..वास्तव में भारत बदल गया है..

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