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गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

तुम बला की नार हो


तुम बला की नार हो
तुम कच्ची कचनार हो //

उड़ता आँचल देख तुम्हारा
फट गए नभ के बादल
अंखियों से जब तीर चली
हो गए लाखों घायल
परागकणों में तुम ही बसती
भौरों की गुंजार हो
तुम कच्ची कचनार हो //

17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति , बधाई।

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  2. Prakrti ke sath nari ki khoobsoorat tulna,
    ati sunder.......

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  3. बहुत खूब सर जी!...मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.

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  4. कहते है अबला नहीं, बला है आज की नारी.

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  5. धधकता ज्वालामुखी अंगार हूँ में

    याँ की शंकर के गले का हार हों में

    मत समझना माला मुझ को सेज ही की

    गरजती बिजली सरस तलवार हूँ मैं

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  6. तुम कच्ची कचनार हो ....गजब

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  7. baaki sab to theek hai...yeh bataiye ki aap pics kahan se choose karte ho...hahahahahh

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