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सोमवार, 21 जून 2010

भारतीय कुत्ते

भारत
कुत्तों के भौकने की
इधर -उधर सूघने की
एक अच्छी जगह ॥

गाहे -बगाहे
समय -कुसमय
चोर देखकर भौकना
और कभी -कभी
बिना चोर देखे
तेजी से भौकना ॥

गज़ब चरित्र है इनका ...
साधारण जनता
इनकी मानसिकता नहीं समझ सकते ॥

कुत्तों की सर्वोच्च संस्था
कहती है .....
भौकने की यह प्रवृति
परिपक्वता को दर्शाता है ॥

12 टिप्‍पणियां:

  1. सत्य वचन भैया ..भौकने की यह प्रवृति परिपक्वता को दर्शाता है ॥मगर जो अक्सर एक टांग उठाने की प्रवृति है उनकी वो क्या दर्शाता है | असल में वोह नेता है जो अपने कुर्सी की एक टांग
    गाहे बहागे उठा उठा के जांच करता है की मैं तीन टांगो पे भी समाज के चुसे हुए खून से गैरजरूरी चीज़ों को निकाल फैंक सकता हु |

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  2. Bharat ek azaad desh hai yahan insaan to insaan kutton ko bhi poori azaadi hai. yahan insaano ko kahin bhi kisi karya mein taang adane ki, aapas mein ladwane ki aur kisi ki personal life mein jhankne ke poori swatantrata hai jo ki ek bikhri hui maansikta ko darshata hai. Bhartiya kutte bhi usi mansikta mein rang gaye hain jo ki aapke lekh se jhalakta jai!

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  3. Sahi kha aapne baban ji ................halat badi hi vichitra hai.....

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  4. Bhai Shri Baban Ji, aap ki rachana bhi thodi si vichitra hai...bulkul sahi kaha hai aap ne
    "गज़ब चरित्र है इनका ...
    साधारण जनता
    इनकी मानसिकता नहीं समझ सकते ॥"
    is liye to ye faida udha rahe hai hamare Raj Neta...mai to dur hun ...abhi BIHAR ME CHUNAV HAI AAP KO TO IS KA NAJARA DEKHANE KO MILTA HI HOGA...bahut acha likha hai aapne...aap ki har ek rachana kabile tarif hoti hai...kahi na kahi wah samajik muddo se judda hota hai...Dhanywaad...

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  5. shukriya ..pandey ji ....khud ek neta dusre neta ke charitr ko nahi samjh paata ..

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  6. बबनजी,
    आपने बिल्कुल सटीक लिखा है... वाकई "गज़ब चरित्र है इनका"... कुत्तों की सबसे बड़ी विशेषता यह भी है कि एक कुत्ता दूसरे कुत्ते को देख के भी भोंकने लगता है, अगर वो उसके खुद के मोहल्ले का ना हो या किसी दूसरे मोहल्ले का हो... कुत्ते की असली पहचान उसकी 'दुम' होती है जो किसी भी हाल में कभी सीधी हो सकती ही नहीं...

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  7. और यह दुम कविता की भाषा में कई रूपों को ...व्यक्त करता है ...वाह मधु भाई

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  8. दिल्ली मे आज कल ऐसे ही दो कुत्तों को एक दुसरे पर भौकते हुए देखा जा सकता है ! दोनो एक ही राशि के लगते हैं एक का नाम शुरु होता है 'श' से तो दुसरे का 'स' से ..फर्क सिर्फ इतना है कि दोनों के लिंग अलग हैं ....पर है दोनो सातिर ..आपने सही कहा है " गज़ब चरित्र है इनका ...साधारण जनता इनकी मानसिकता नहीं समझ सकते"

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  9. Baban Bhai...Kya baat hai...aap baton hi baton itni gehri bat keh jate hain jise padh kar dil khush ho jata hai....bas isi tarha likhte rahiye aur samaj ka OPERATION karte rahiye...all the best

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  10. Babanji, kuch to aise hote hai jo bina mauke ke to bhaunkte hai......par samay aane par chup ho jaate hai.aison ko kya kahenge?? very expressively written.

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  11. श्री बब्बन जी आप हर बार इतनी सरल शब्दों व् भाषा से इतना ऊंचा शिकार करने में सफल हो जातें है ? ये आपकी दिव्य छमता को दर्शाती है I आपने सही ही कहा हैI ये कुत्तों की जगह भारत ही है I विदेशों में ये परिवार के सदस्यों में सबसे प्रिय सदस्य होता है I उसके ऊपर लोग अपनी सारी दौलत, प्यार व् जीवन का अधिकाँश समय लुटा देंते हैंI पर यह भारत ही महान है, जहां कुत्तों को खुले आम आजादी से घूमने और भोंकनें दिया जाता है I अपना अपना राग भोंकनें की शक्ति,नियत, प्रभुत्व व् अपनी अपनी ढपली (मंदिर, मस्जिद,आतंकवाद,भ्रष्टाचार, उनके सबके नेता कुत्ता नेताजी )से अलग अलग राग व् तान सुनानें व् निकालने में परिपक्व हैं I इन्होनें आधुनिकता का गौरव भी हांसिल कर लिया है I हहहहः हा हा हा हा ह्ह्ह

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  12. विदशों में (आदमी) कुत्ते नहीं होते सिर्फ घड़ियाल होते हैं जो विरोधी को भौंकने से पहले ही गोली मार कर हज़म कर जाते हैं .... वहाँ आदमी की उच्च कोटि है न ...

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