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सोमवार, 21 जून 2010

आओ , एक स्वस्थ समाज बनाएं

सभी मर्दों को
धोती और कुरता पहना दो ...
सभी महिलायों को
घूँघट तनवा दो ....
और बच्चों के लिए
गुरुकुल खुलवा दो यार !!
समाज विघटित होने से बच जाएगा ॥

अपनी जाति में ही
विवाह का तुगलकी फरमान जारी करवा दो ...
टी ० वी ० उठाकर
कचड़े में फेकवा दो ....
इन्टरनेट के तार
कटवा दो ......
समाज विघटित होने से बच जाएगा ॥

गंगा स्नान
अनिवार्य करबा दो ...
राम चरित मानस पाठ करना
कानूनन आवश्यक करवा दो .....
सभी फैक्ट्री बंद करवा दो
जाति गत पेशे को पुनः लागू करो ...
समाज विघटित होने से बच जाएगा ॥

मगर ...मेरे दोस्त !!
नेताओ को
उनकी बहुरंगी चाल चलने दो ...
"कर्म नहीं, धर्म महान है"
का नारा गूंजने दो
अमीरी -गरीबी की खाई
को बढ़ने दो
कोई पांच क्या
पंद्रह हज़ार हत्याएं करे
उसे खुले घुमने दो ...यार
ऐसा कर
हम एक स्वस्थ समाज बना लेगें ॥

2 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut hi acha kaha hai aapne...Kash aaj ka samaj aap ki is kavita se kuch sikha leta...aap ki ye kavita aaj ke samaj ke liye bahut hi upyogi hai...is yogdan ke liye aap ko dhanybaad...Ma Saraswati ki kripa aap par bani rahe...

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